जिसके मन में बस जाए तु उसका मन मंदिर बन जाए।
मिल जाए हर मंजिल, गर तू (2) तारा बन कर राह दिखायें।।
जिसके मन में बस जाए तु उसका मन मंदिर बन जाए।
खुले आंख तो तु जन जन में, जो मूंदु तो अन्तर्मन् में (2)
है रूहानी कलामों में तु (4) तु हीं भक्तों के भजन में।।
जिसके मन में बस जाए तु उसका मन मंदिर बन जाए।
तेरे स्मरण में जितना बीते बस सच्चा है उतना ही पल। (2)
गहरा हो जो झील का पानी (2) मचें फिर क्यों उसमें हलचल।।
जिसके मन में बस जाए तु उसका मन मंदिर बन जाए।
हॉं एक है तु, सबका है तु, ज्यों रौशन सूरज सबका है (2)
हर कतरा तेरा ही तो है– तु हर कतरे में बसता है।।
जिसके मन में बस जाए तु उसका मन मंदिर बन जाए (3)